रविवार, 29 दिसंबर 2024

चंद्रमोहन किस्कू की कविता में सत्यमेव जयते का उपदेश (Chandramohan kisku ki kavita mein satyamev jayate ka updesh -aadiwasi kavita)

चंद्रमोहन किस्कू की कविता में सत्यमेव जयते का उपदेश

-Dr. Dilip Girhe


सत्य

सभी लोगों को 

इसका अफ़सोस है 

कि 

सत्य 

हर समय अपना 

असली मुखड़ा 

नहीं दिखा सकता 

अधिकार और सच्चाई की बात 

चिल्लाकर बोलने पर 

कोई सुनता ही नहीं 

अत्याचार के विरोध में 

हाथ ऊपर कर खड़े होने के समय 

पैर उसके लड़खड़ाते हैं 

असत्य और हिंसा एक साथ 

सामने आने पर 

वह पीछे हट जाता है 

इतने पर भी 

अंत में 

सत्य की ही जीत होती है 

हाँ, यह सत्य है

कि 

सत्य के सामने आने में 

थोड़ा तो वक़्त 

लगता ही है

सच कभी 

झूठ नहीं हो सकता है 

सात दरवाज़ों के भीतर 

बंद कर रखने पर भी 

उसके रास्ते में 

काँटे बिछाने पर भी 

सत्य को 

रोक नहीं पाओगे 

सुबह सूर्य की 

नवकिरण जैसी 

लाली बिखेरते हुए 

सत्य सामने आकर 

मनुष्यों के मन में 

आनंद भर देता है।

   -चंद्रमोहन किस्कू-महुआ चुनती आदिवासी लड़की 


कविता का भावार्थ-

संसार में कोई भी व्यक्ति सत्य को अब तक हारा नहीं कर पाया है। भले ही इसे हराने के लिए लाख कोशिशें किये जाते हैं। लेकिन इसे हराना असंभव है। संताली भाषा के लेखक चंद्रमोहन किस्कू ने अपनी कविता 'सत्य' सत्य की सत्यता के विविध संदर्भ स्पष्ट किये हैं। यह सभी लोग जानते हैं कि सत्य हर समय अपन असली चेहरा नहीं दिखा सकता है। किंतु सच्चाई, अधिकार, हक की बात बताने ने के लिए सत्य ही सामने आता है। जब कोई अपने हक़ अधिकार को चिल्ला-चिल्लाकर प्रस्तुत करता है तो सत्य की उपयोगिता हमें दिखती है। परंतु असत्य और अहिंसा का वज़न अधिक हो जाता है तो सत्य की झुकना या पीछे हटना पड़ता है। लेकिन उसे जड़ से कोई नहीं उखाड़ पाया है। 

इतना ही नहीं सत्य को पराजित करने के लिए असत्य और अहिंसा का साथ देने के लिए अधिक लोग साथ में रहते हैं। किंतु सत्य हमेशा विजयी रहा है। वह भले ही विजयी पाने के लिए ज्यादा संघर्ष करता है। अंत में उसकी जीत पकी होती है। सत्य को सात दरवाजे के अंदर भी बंद किया जाए तो वह इन सभी दरवाजों को तोड़कर अंत में बाहर आ ही जाता है। उसे बाहर आने के लिए रास्ते में कितने भी क्यों काँटे बिछाए जाए। उन सभी काँटों को रौंदकर वह बाहर आ जाता है। जैसे कि सुबह की सूरज की किरणें रौनक ला देती है। वैसे ही सत्य बाहर आकर मनुष्य के मन में आनंद भर देता है।

इस प्रकार से कवि चंद्रमोहन किस्कू अपनी कविता सत्य में सत्यमेव जयते का उपदेश देते हैं।


संदर्भ

चंद्रमोहन किस्कू-महुआ चुनती आदिवासी लड़की काव्य संग्रह

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