शनिवार, 22 मार्च 2025

जसिंता केरकेट्टा ने अपने काव्य में उपस्थित किए जनहित में प्रश्न (janhit mein-jasinta kerketta ki kavita)

जसिंता केरकेट्टा ने अपने काव्य में उपस्थित किए जनहित में प्रश्न

-Dr.Dilip Girhe 

जनहित में

मेरा पालतू कुत्ता

सिर्फ़ इसलिए मारा गया

क्योंकि ख़तरा देख वह भौंका था।

मारने से पहले उन्होंने

उसे घोषित किया पागल

और मुझे नक्सल—

जनहित में।

-जसिंता केरकेट्टा 


काव्य संवेदना:

साहित्य में प्रतीकों का प्रयोग कवि कई बार करता है। कवि को कोई बात सीधी अगर न कहानी हो तो वह प्रतीकों के माध्यम से उसे पाठकों के सामने रखता है। कवयित्री जसिंता केरकेट्टा झारखंड के अनेक प्रश्नों को काव्य में व्यक्त करती है। झारखंड आदिवासी बहुल राज्य होने के कारण यहाँ पर बहुसंख्यक मात्रा में आदिवासी समुदाय जीवनयापन करता है। साथ ही झारखंड के कुछ प्रदेशों को सरकार ने नक्सल घोषित किया है। इसी क्षेत्र में आसपास आदिवासी समुदाय भी अपना गुजर-बसर करता है। वह नक्सल समस्या से काफी परेशान हो जाता है। ऐसी समस्याओं को देखते हुए जसिंता ने 'जनहित में' कविता लिखी है। कवि ने अपने पालतू कुत्ते की कहानी को जनहित काव्य में रेखांकित किया है। वे कहती है कि जब हम  नक्सल प्रभावित क्षेत्रों जीवन जीते हैं तो कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसी ही समस्या मेरे साथ कई बार घटित हुई है। एक कुत्ते को इसीलिए मारा गया क्योंकि वह भौका था। इसी गलती के कारण उसे पहले पागल घोषित किया और मार दिया गया। इसी प्रकार से वहां जीवन जी रहे कई मासूम आदिवासियों को भी नक्सल घोषित करके सरकार द्वारा बेवजह मारा जाता है। ऐसे जनहित में सरकारी निर्णयों को सरकार को सूझबूझ से लेना आवश्यक है। ऐसे कई समस्याएं कवि जसिंता केरकेट्टा अपनी कविताओं में व्यक्त करते हैं।   

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